Best Mausam Shayari in Hindi

मौसम का बदलना सिर्फ आसमान और हवाओं का रंग नहीं बदलता, बल्कि दिल के जज़्बातों को भी हिला देता है। कभी ठंडी हवाएँ सुकून देती हैं, तो कभी बारिश और धूप पुरानी यादों को ताज़ा कर देती हैं। Mausam Shayari In Hindi इन्हीं बदलते पलों और एहसासों को खूबसूरती से शब्दों में बयां करती है।

ये शायरियाँ मौसम के हर रंग में छुपे प्यार, तन्हाई, खुशी और उदासी को बखूबी पेश करती हैं। मौसम पर लिखी शायरी दिल को छू जाती है और हमें उन लम्हों से जोड़ देती है, जो हर बदलते मौसम के साथ याद बन जाते हैं।

Mausam Shayari in Hindi

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे,
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे।

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे,
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ।

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था,
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था।

बहुत से ग़म दिसम्बर में दिसम्बर के नहीं थे,
उसे भी जून का ग़म था मगर रोया दिसम्बर में।

बिखरी ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शाइ’री,
झुकती आँखों ने बताया मय-कशी क्या चीज़ है।

मेरे पास से उठ कर वो उसका जाना,
सारी कैफ़िय्यत है गुज़रते मौसम सी।

Mausam Shayari

जैसा मूड हो वैसा मंज़र होता है,
मौसम तो इंसान के अंदर होता है।

बैठे बैठे फेंक दिया है आतिश-दान में क्या-क्या कुछ,
मौसम इतना सर्द नहीं था जितनी आग जला दी है।

मैं आखिर कौनसा मौसम तुम्हारे नाम कर दू,
यहां हर मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है।

फितरत ही कुछ ऐसी है इस जहान की,
यहां तो बदल तक रंग बदलते हैं।

मुझे फ़ुर्शत हु कहा है के मौसम सुहाना देखूं,
आप की याद से निकलूं तो ज़माना देखूं।

ढलने लगी थी शाम के तुम याद आ गए,
फिर यूं हुआ कि रात बहुत देर तक चली।

मौसम जो थोड़ा सर्द हुआ,
फिर वही पुराना दर्द लौट आया।

कभी करीब तो कभी दूर होते हैं,
ये मोहब्बत के भी मौसम अजीब होते हैं।

हज़ार बार मौसम बदल गया लेकिन,
हमारी उनसे बिछड़ने की तारीख नहीं बदली।

Mausam Shayari Gulzar

कोई आशिक भी ना रोया हो इतना, अपने महसूब से बिछड़ने के बाद,
जितना ये आसमान तो रहा है बिना किसी चांद के।

बदलते मौसम के साथ लोग भी बदल जाते हैं,
पर मौसम फिर लौट आते हैं, लोग नहीं।

मंजर भी बेनूर थे,
और फिजाएं भी बेरंग थीं,
तुम्हारी याद आई और मौसम सुहाने हो गए।

ए मौसम कैसी है ये तेरी बेवफाई,
परायों की याद को मिटाना था,
तूने अपनों की ही कर दी सफाई।

Mausam Shayari 2 Line

ऐ मौसम मुझे वहाँ ले चल,
जहाँ उसके और मेरे बीच कोई दूरी ना रहे…!

मेरी ख्वाइश आज मुझसे पूछती है,
तेरी ख्वाइश क्या है…!

चलने लगती हैं ये मौसम की भी साँसे,
जब कोई झोका तेरी पलकों की हवा का लहराए…!

जान ये मौसम तो कुछ लम्हों में बदल जाएगा,
वादा करो तुम नहीं बदलोगे…!

Romantic Mausam Shayari

उनके प्यार में इस कदर मदहोश है कि,
बारिश की बूंदों का स्पर्श भी उन्हीं का एहसास कराता है…!

बारिश यूं अचानक आई,
ऐसा लगा तुम मेरे शहर में हो…!

मैं बादलों से ये गुज़ारिश करूँगा,
तुम मेरे पास हो जब भी ये बारिश हो…!

बारिश में भीगने का मज़ा तब आता है,
जब भीगने वाले दो हों और छाता एक…!

मुझे बारिश से इतना लगाव है,
कि एक मौसम मेरे अंदर भी ऐसा रहता है…!

कुछ तो हुआ है इस बार की बारिश में,
वरना बादल लगातार यूं नहीं बरसते…!

Barish Mausam Shayari in Hindi

ये बारिश का मौसम जब भी आता है,
अपने साथ सुहाने पल भी लाता है।

कोई अजीब सी ख्वाइश रो रही है,
मेरे जिस्म में बारिश रो रही है।

दिल को किसी की फरमाइश नहीं हुई,
फिर उसके बाद ऐसी बारिश नहीं हुई।

जो कभी बादल बनकर बरसा था,
उसी की ख्वाइश में दिल तरसा था…!

हर बारिश में तेरा इंतजार करू,
मैं तुझे हद से ज्यादा प्यार करू…!

तुम अपना ग़म भूल जाओगे दोस्त,
जिस दिन बारिश में नहाओगे दोस्त…!

Conclusion

मौसम की शायरी सिर्फ प्राकृतिक बदलावों का ही नहीं, बल्कि दिल के जज़्बातों का भी प्रतिबिंब है। Mausam Shayari हर लम्हे को, हर एहसास को शब्दों में जीवंत कर देती है। चाहे बारिश की नमी हो, ठंडी हवाओं का सुकून, या बदलते मौसम की यादें—ये शायरियाँ हमें हमारी भावनाओं और यादों से जोड़ देती हैं।

हर मौसम की अपनी कहानी है, और हर शायरी उस कहानी को महसूस करने का मौका देती है। Mausam Shayari पढ़कर हम न सिर्फ मौसम का रंग महसूस करते हैं, बल्कि दिल की गहराइयों में छुपे जज़्बातों को भी जी उठाते हैं।

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